हर चार साल बदलती है प्रतिमा, अटूट 51 वर्ष की परंपरा: कटवा के धारा हाउस में लक्ष्मी पूजा
51 वर्षों से पूर्व बर्धमान के कटवा स्थित धारा हाउस में परंपरा और भक्ति के साथ कोजागरी लक्ष्मी पूजा मनाई जा रही है। इस पूजा की शुरुआत परिवार के पूर्वज मुक्तिपदा धारा और उनके पुत्रों ने की थी। पाँच दशकों से अधिक समय से पीढ़ी दर पीढ़ी देवी लक्ष्मी की आराधना की पारिवारिक परंपरा का पालन किया जा रहा है।
धारा हाउस की लक्ष्मी पूजा की एक प्रमुख विशेषता मूर्ति को संरक्षित रखने और उसे नया रूप देने की विशेष प्रथा है। हर साल नई मूर्ति बनाने के बजाय पुरानी मूर्ति को ही नया रूप दिया जाता है। नई साड़ी और आभूषणों के साथ मिट्टी के कारीगर द्वारा अंगराग प्रक्रिया से मूर्ति का रंग और आँखें फिर से बनाई जाती हैं।
हालांकि, हर चार साल में पूरी तरह से नई मूर्ति बनाई जाती है और तब पुरानी मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। विशेष महत्व की बात यह है कि इस पूजा की मूर्तियाँ पीढ़ियों से एक ही मिट्टी के कारीगर परिवार द्वारा बनाई जा रही हैं। इस कारण मूर्ति निर्माण की यह निरंतरता धारा हाउस की पूजा-विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
यह विशेष लक्ष्मी पूजा दुर्गा पूजा की दशमी के बाद कोजागरी पूर्णिमा की रात को धारा हाउस में होती है। समय के साथ पूजा की व्यवस्था और सजावट में कुछ बदलाव जरूर आए हैं, लेकिन पारिवारिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में कोई व्यवधान नहीं आया है।
आस्था, भक्ति और पारिवारिक परंपरा के संगम से धारा हाउस में 51 वर्षों से देवी लक्ष्मी की आराधना जारी है। परिवार के सदस्यों के साथ इस पूजा के आसपास के क्षेत्र में एक विशेष उत्सव का माहौल भी बन जाता है।
फोटो: आकाश कुमार धारा, कटवा, पूर्व बर्धमान।
समाचार प्रेषक: आकाश कुमार धारा